Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
क्यूं नृप-नारी नींदिये, क्यूं पनिहारी कौ मान । वा माँग सँवारे पील कौ, या नित उठि सुमिरैराम ॥
Kabir 21.74
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
क्यूं नृप-नारी नींदिये, क्यूं पनिहारी कौ मान । वा माँग सँवारे पील कौ, या नित उठि सुमिरैराम ॥
Kabir 21.74
No translations available for this verse yet.