Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
स्वाँग पहरि सो रहा भया, खाया-पीया खूंदि । जिहि तेरी साधु नीकले, सो तो मेल्ही मूंदि ॥
Kabir 21.59
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कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
स्वाँग पहरि सो रहा भया, खाया-पीया खूंदि । जिहि तेरी साधु नीकले, सो तो मेल्ही मूंदि ॥
Kabir 21.59
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