Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
झूठे सुख को सुख कहै, मानता है मन मोद । जगत चबेना काल का, कुछ मुख में कुछ गोद ॥
Kabir 19.90
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कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
झूठे सुख को सुख कहै, मानता है मन मोद । जगत चबेना काल का, कुछ मुख में कुछ गोद ॥
Kabir 19.90
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