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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―कलियुग मे लोभी और मनचले लोग ही सम्मान के पात्र होते हैं। चारिऊॅ वेद पढ़ाई करि, हरि सूॅ न लाया हेत। वालि कबीरा ले गया, पण्डित ढूॅढै खेत॥

Kabir 17.9

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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―कबीरदास जी कहते हैं कि चारो वेदो को पढ़ करके भी पंडित परमात्मा से प्रेम नही कर पाते हैं। भक्ति की भावना उनमे नही आ पाती है। भक्ति रूपी खेती की वास्तविक फसल बाली को तो मैंने ग्रहण कर लिया है अब पडित लोग व्यर्थं मे उसमे अग्न खोजने-की तत्व खोजने की चेष्टा कर रहे हैं।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―बालि=वाली।