―कबीरदास जी कहते हैं कि यह कलियुग अत्यन्त खोटा है इसमें कोई श्रेष्ठ मुनि नहीं मिल पाता है इसमे तो उन्ही व्यक्तियों का सम्मान हो पाता है जो लालची, लोभी और मनचले होते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―कलियुग के सन्यासी लोभी वृत्ति के होते हैं। कबीर कलि खोटी भई, मुनियर मिलै न कोइ। लालच लोभी मसकरा, तिनकूॅ आदर होइ॥
Kabir 17.8
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―मूनियर=मुनिवर=श्रेष्ठमुनि। मसकरा=मसखरा, मनचला।