―कलियुग के स्वामी सन्यासी अत्यन्त लोभी होते हैं वे अपनी इच्छाओ-अभिलाषाओ को अत्यन्त बढा चढ़ाकर रखते हैं। वे व्याज पर रुपया उधार देत हैं और बड़ी-बडी बहियो (बहीखाता) मे उसका हिसाब रखते हैं तब भला बताइए कि उनमे और एक ससारी प्राणी मे क्या अन्तर है?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―पाखंड करने और ईश्वर की भक्ति करने में बहुत बड़ा अंतर है। कलि का स्वांमीं लोभिया, मनसा धरी बधाई। दैंहि पईसा व्याज कौं, लेखाँ करतां जाइ॥
Kabir 17.7
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―मनसा=इच्छाएं, अभिलाषाएं।