―हे जीवात्मा। तू कण भर सपत्ति का स्वामी होकर भी दभ मे आकर पचासो सेवक बना रखे हैं हृदय से तूने कभी राम का नाम लिया ही नहीं केवल जीभ से ही राम नाम का उच्चारण करता रहा और अबतू शिष्य बनाने की आशा करता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
स्वामी हुवासीत का, पैकाकार पचास। राम नाम काँठै रहया, करै सिषाँ की आस॥
Kabir 17.4
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―सांसारिक व्यक्ति दम्भ मे ही लिप्त रहते हैं।
Padārtha — Word-meaning
―सीत=दाना, कण। पैकाकार=सेवक। काठै=कठ।