―जो व्यक्ति दूसरो की स्त्री मे अनुरक्त रहता है और चोरो की कमाई खाता है वह थोड़े दिनो के लिए भलेही फला फूला दिखाई दे समृद्धवान् हो जाय किन्तु अन्त मे जड़ सहित नष्ट हो जाता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
परनारी राता फिरैं, चोरी बिढ़ता खाँहिं। दिवसि चारि सरसा रहे, अंति समूला जाँहिं॥
Kabir 17.33
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―पर स्त्री मे अनुरक्त एवं चोरी का धन खाने वाले का लोक और परलोक दोनो नष्ट हो जाते हैं।
Padārtha — Word-meaning
―राता=अनुरक्त। बिढ़ता=समृद्ध। सरसा=फूलना, फलना।