―कबीर दास जी कहते हैं कि स्त्री मधुमक्खी के समान है जिस प्रकार मधुमक्खी को जो कोई छेडता है उसी को खा जाती है उसी प्रकार स्त्री को भी जो कोई छेड़ता है वह उसी का परलोक बिगाड़ देती है। किन्तु जिन्होने अपने मन को भगवान के चरणो मे लगा रखा है उनके निकट जाने का साहस यह मधुमक्खी रूपी स्त्री नहीं कर पाती है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कांमणि मींनीं षांणि की, जे छेड़ौं तौ खाइ। जे हरि चरणां राचिया, तिनके निकट न जाइ॥
Kabir 17.32
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―नारी का प्रभाव ईश्वर के भक्तो पर नहीं पड़ता है।
Padārtha — Word-meaning
―मीनी=मक्खी। पाणि=शहद।