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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

सौंदर्भ―शास्त्रादि के पाठ से ही मुक्ति सम्भव नही होती है । मुक्ति तो प्रभु-प्रेम से ही प्राप्त होती है। पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ। एकै अषिर पीव का, पढ़ सु पंडित होइ॥४॥

Kabir 17.30

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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―संसार के समस्त धर्म ग्रन्थो को पढ-पढ करके सारा संसार मरा गया किन्तु उनमे से कोई भी वास्तविक पंडित नहीं हो सका। किन्तु जिसने प्रियतम का (प्रभु का) एक शब्द ‘राम’ पढ़ लिया वह वास्तव मे पंडित हो गया।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―मुवा=मरा। ​ २०. कामी नर कौ अंग