―इस संसार मे स्वामी बनना तो सरल है कोई भी व्यक्ति अपने अहंकार को प्रदर्शित कर कुछ व्यक्तियो पर अपना स्वामित्व प्रदर्शित कर सकता है किन्तु परमात्मा का भक्त बनना अत्यन्त कठिन है। जिस प्रकार भेड को ऊन प्राप्ति के लिए पाला जाता है किन्तु वह घर आकर कपास को भी चर लेती है ठीक उसी प्रकार ईश्वर भक्त मे यदि अह्म की भावना आ जाती है तो उसका परलोक और यह लोक दोनो नष्ट हो जाते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
स्वामी हूॅणाॅ सोहरा, दोद्धा हूॅणाँ दास। गाडर ऑणीं ऊन कूॅ, बाँधी चरै कपास॥
Kabir 17.3
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―ईश्वर भक्त बनना अत्यन्त कठिन है।
Padārtha — Word-meaning
―सोहरा=साल। दोद्धा=दुर्लंभ। गाडर=भेड।