―कबीरदास जी कहते हैं कि वेद शास्त्रों का अध्ययन करना छोड़ दे क्योकि उसके पढ़ने के बाद भी ससार का अन्त हो जाता है। यदि हृदय मे प्रभु-प्रेम की पीड़ा न उत्पन्न हुई तो केवल राम नाम का उच्चारण मात्र करने से क्या लाभ?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सदर्भ―प्रभु-भक्ति ही जीव का काम्य है। कबीर पढ़िवा दूरि करि, आथि पढ़्या संसार। पीड़ न उपजी प्रीति सूॅ, तौ क्यूं करि करै पुकार॥
Kabir 17.29
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―आदि=अत।