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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर पढ़िवा दूरि करि, पुसतक देइ बहाइ। बांवन आषिर सोधि करि, ररै ममैंचित लाई ॥

Kabir 17.28

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Translations & commentaries(1)

Sūtra Translation

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―कबीरदास जी कहते हैं कि पढना बन्द करके पुस्तको को वहा दे। और वर्णमाला के ५२ अक्षरो का भली प्रकार से शोध करके उसमे से केवल दो अक्षर 'र' और 'म' में अपने चित्त को लगा दे। उसी से मुक्ति प्राप्त होती है। शव्दार्थ―आषिर=अक्षर। ररै ममै=‘र’ और ‘म’।