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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

मैं जांन्यू पढ़िवौ भलौ, पढ़िया थैं भली जोग। रांम नांम सू प्रीति करि, भलभल नींदौ लोग॥

Kabir 17.27

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―कबीरदास जी कहते हैं कि इस बात को मै भली-भांति जानता है कि वेद शास्त्रों का पढना अच्छा काम है किन्तु उससे भी अच्छा योग साधना करना ​है किन्तु यदि इनका ज्ञान न हो तब भी राम नाम का स्मरण करना अच्छा है भले ही लोग निन्दा करते रहे।

Bhāṣya Commentary

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―जीव को प्रभु-भक्ति मे ही प्रवृत्त होना चाहिए।

Padārtha Word-meaning

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―पढ़िबौ=पढना। थैं=से। भल भल=भले ही।