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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

करता दीसै कीरतन, ऊँचा करि करि तूंड। जांणैं बूझै कुछ नहीं, यौं ही आँधाँ रुड॥५॥

Kabir 17.26

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―जो व्यक्ति राम नाम का कीर्तन, बिना उसके महत्व को समझे हुए मुंह उठा-उठा कर ऊंचे स्वर से करते हैं वह वास्तविकता तो कुछ नही जानते-बूझते हैं अंधे रुंड के समान बिना सिर के शरीर के नीचे के भाँग के समान इधर-उधर डोलते हैं। १९. कथणीं बिना करणी कौ अंग

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―बाह्य रूप से ही राम नाम की रट लगाने से कुछ नही होता जब तक हृदय से उसकी भक्ति नहीं होती है।