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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

पद गाएँ मन हरषियाॅ, साषी कहयाँ अनन्द। सोतत नांव न जांणियाँ, गल में पड़िया फंध॥

Kabir 17.25

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―मनुष्यो को ईश्वर भक्ति के पद गाने से मन मे प्रसन्नता होती है और साखियो को कहने से आनन्द मिलता है ऐसा लगता है कि उन्होने ईश्वर की सम्पूर्ण भक्ति कर ली है। किन्तु बिना उस परम तत्व के रहस्य को जाने और ध्यान किए उनकी मुक्ति नहीं हो पाती है और वे अन्त तक काल-पाश मे ही पड़े रहते हैं।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―ब्रह्म के पूर्ण रहस्य को समझे बिना जीव को मुक्ति नही मिल पाती है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―तत=तत्व। फंध=फन्दा।