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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

जैसी मुख तैं नीकसै, तैसी चालै नाहिं। मानिष नहीं ते स्वान गति, बांध्या जमपुर जाँहि॥

Kabir 17.24

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―जो व्यक्ति अपने मुख से दूसरो के उपदेश हेतु निकाली हुई बात पर स्वयं नही चलते हैं आचरण नहीं करते हैं वे व्यक्ति मनुष्य नहीं है बल्कि कुत्तो के समान हैं वे पापाचरण के कारण बाँधकर यमलोक ले जाये जाते हैं। ​

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―केवल दूसरो को हो उपदेश देने वाला और स्वयं उस पर आचरण न करने वाला व्यक्ति कुत्ते के समान होता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―स्वांन=श्वान=कुत्ता।