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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

जैसी मुख तैं नीकसै, तैसी चालै चाल। पारब्रह्म नेड़ा रहै, पल में करै निहाल॥

Kabir 17.23

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―जिस प्रकार की बातें मनुष्य के मुख से दूसरों के लिए निकलती हैं यदि उस पर वह स्वयं भी आचरण करे तो परब्रह्म उसके समीप ही रहता है और क्षण भर मे उसको मुक्ति प्रदान करके निहाल कर देता है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―यदि कथनी के समान आचरण भी हो जाय तो क्षण भर मे मुक्ति मिल जाय।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―नेड़ा=समीप। निहाल=प्रसन्न।