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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

इहि उदार के कारणैं, जग जाच्यौं निस जाम। स्वामीं पणों जु सिरि चढयौ, सरया न एकौ काम॥

Kabir 17.2

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―सांसारिक जीव अपनी उदरपूर्ति के लिए रातदिन संसार मे भटक-भटक कर याचना किया करते हैं किन्तु उनके अदर जो स्वामीपन की भावना का अहंकार होता है उसके कारण उनका एक भी काम नहीं बन पाता है न यह लोक ही सुख कर हो पाता है और परलोक मे ही मुक्ति का मार्ग बन पाता है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―अहंकार के कारण जीव किसी लोक को भली भांति सभाल नही पाता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―स्वामी पणैं=स्वामीपना। सर्या = सिद्ध हुआ, बना।