―कबीर दास जी कहते हैं इस संसार के जीवों को कितनी बार समझाऊं कि माया का आश्रय ग्रहरण कर भवसागर को पार उतरने की चाह रखना बिलकुल व्यर्थ है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर इस संसार कौं; समझाऊॅ कै बार। पूँछ ज पकड़ै भेद की, उतर्या चाहै पार॥
Kabir 17.19
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―माया का आश्रय ग्रहण कर कही जीव संसार―सागर को पार उतर सकता है?
Padārtha — Word-meaning
―भेद=माय।