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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कासी कांठैं घर करैं, पीवै निर्मल नीर। मुकति नहीं हरि नाव बिन हौं कहै दास कबीर॥

Kabir 17.18

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―शकर की पुरी काशी में निवास करते हुए और गंगाजी का निर्मल जल पीते हुए लोग मुक्ति की आशा करते हैं किंतु कबीरदास जी इस प्रकार कहते हैं, बिना हरि नाम के स्मरण के जीव को मुक्ति मिलना असंभव है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―ईश्वर के नाम-स्मरण के बिना मुक्ति नहीं प्राप्त हो सकती है। क० सा० फा०―१३ ​

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―कासी काठैं=काशी में निवास करते हुए।