―ताराओं के मध्य मे आकाश मंडल में विराजमान होकर चन्द्रमा ऐश्वर्य को प्राप्त करता है किन्तु सूर्य के उदय होने पर वह तारो के साथ अस्त हो जाता है ठीक उसी प्रकार जीव अज्ञानान्वकार में पड़ा रहता है ज्ञान के उदय होने पर संपूर्ण इच्छाएं नष्ट हो जाती हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
तारा मंडल वैसि करि, चंद बड़ाई खाइ। उदै भया जब सूर का, स्यूँ तारां छिपि जाइ॥
Kabir 17.16
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―स्यूं=साथ।