―कुछ किसान अपने खेतो के अनाज की रक्षा न करके थोडा अन्न पाने के लिए दूसरो के खेत की रक्षा करते हैं उसी प्रकार ढोगी पंडित दूसरो को हो उपदेश देते रहते हैं स्वयं तो विषय-वासना मे पडकर अपना जीवन नष्ट करते रहते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
रासि पराई राषताँ, खाया घर का खेत। औरों कौं प्रमोधताँ, मुख मैं पड़िया रेत॥
Kabir 17.15
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―ऐसे पंडितो के प्रति संकेत है जो दूसरो को तो उपदेश देते रहते हैं किन्तु स्वयं विषय-वासना ग्रस्त रहते हैं।
Padārtha — Word-meaning
―रासि=अन्न का ढेर।