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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

पाड़ोसी सूॅ रूसणाँ, तिल-तिल सुख की हाँणि। पंडित भये सरावगी, पॉणी पीवै छाॅणि॥

Kabir 17.12

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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―कबीर दास जी कहते हैं कि अपने पडोसी से रूठ जाने पर प्रत्येक क्षरण के सुख की हानि होती रहती है किन्तु इसका विचार जैन सम्प्रदाय वाले नही करते हैं वे पानी तो छान-छान कर पोते हैं किन्तु पड़ोसियों से रूठे रहते हैं। ​ शव्दार्थ―रूसणां=रूठना। सरावगी=जैन साधु।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―पड़ोसी से द्वेष करने से हुख कभी नहीं प्राप्त हो सकता है।