ब्राह्मण तो सारे संसार का गुरु है किन्तु वह साधुओ का गुरु नहीं हो सकता है क्योकि वह तो चारो वेदो को ही उलट-पुलट कर ब्रह्म तत्व को खोजता रहता है और साधू प्रेम के द्वारा ईश्वर को प्राप्त करने की चेष्टा करते हैं। शव्दार्थ―उरझि पुरझि=उलझ-पुलझकर।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सौंदर्भ―पुराण पथियो की निन्दा और व्यंग्य है। ब्राह्मण गुरु जगत का, साधू का गुरु नाहि। उरझि-पुरझि करि मरि रह्या, चारिडॅ वेदां माहिं॥
Kabir 17.10
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―वेदो को निन्दा की गई है।