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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

जिव बिलंब्या जीव सौ, अलख न लखिया जाइ। गोबिंद मिलै न झल बुझै, रहि बुझाइ बुझाइ॥

Kabir 17.1

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―एक जीव दूसरे जीव का सहारा ले रहा है अलक्ष (नराकार) परमात्मा को कोई नहीं देखता। जब तक प्रभु मिलन नहीं होगा तब तक सांसारिक तापो कि अग्नि का बुझना शान्त होना असम्भव है भले हो इसके बुझाने के अनेको प्रयत्न किये जायें।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―माया जन्य दुखो की ज्वाला प्रभु दर्शनो से ही शांत हो सकती है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―विलंब्या=सहारा लिया। अलप=निराकार ब्रह्म। झल=अग्नि।