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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर माया मोहनी, माँगि मिलै न हाथि। मनह उतारी झूठ करि, तब लागो डोलै साथि॥

Kabir 16.9

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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कबीरदास जी कहते हैं कि माया ऐसी मोहक है कि जो इसको हाथ फैलाकर माँगते हैं उनको यह नहीं प्राप्त होती है किन्तु जिन भक्तो और साधको ने इसको मिथ्या समझ कर अपने मन से निकाल दिना है उनके पीछे यह डोलती रहती है।

Bhāṣya Commentary

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माया मोहक होते हुए भो ईश्वर भक्तो के पीछे दौड़ती है। इसके परित्याग मे ही मंगल है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

मनह=मन से।