―कबीरदास जी कहते हैं कि माया इतनी जादूगरनी है कि सम्पूर्ण संसार को अपने फंदे मे डालकर तेवो को घानी के समान पीस डालती है। कोई बिरला व्यक्ति हो इसके प्रभाव से बच सकता है जो सांसारिक मान-मर्यादाओ को छोडकर परम्पराओ का परित्याग कर देते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर माया मोहनी, सब जग घाल्या घाँणि। कोई एक जन ऊबरै, जिन तोड़ी कुल की कांणि॥
Kabir 16.8
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―जो व्यक्ति माया की ओर आकर्षित नहीं होता, वह मुक्ति प्राप्त कर लेता है।
Padārtha — Word-meaning
घाल्या=मारा। कुन की कांणि=कुन की मर्यादा, जीवात्मा की परम्पराओ को तोड़ना।