―कबीरदास जी कहते हैं कि माया खाँड के समान मीठी और मोहक है। सबको अपनी ओर आकर्षित करने वाली है। सतगुरु की कृपा हो गई इसलिए मैं इसकी चपेट से बच गया हूँ अन्यथा तो यह मुझे बर्बाद करके ही दम लेती।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर माया मोहनी, जैसी मीठी खाँण। सतगुरु की कृपा भई, नहीं तौ करती माँड॥
Kabir 16.7
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―सतगुरु की कृपा से मनुष्य माया के प्रभाव से बच पाता है।
Padārtha — Word-meaning
भाँड=अत्यन्त बीच, निकृष्ट।