―प्रत्यक्ष मे ऐसा लगता है कि मैं परमात्मा का बहुत भजन करता हूँ किन्तु मेरे मन मे सासारिक आशाएं अत्यन्त तीव्रता से भरी हुई है। किन्तु यह माया अत्यत विश्वासघातिनी है यह तो जीव और ब्रह्म के बीच अन्तर डाल देती है। शव्दार्थ―मोटी आस=विषयो की तीव्र तृष्णा। घालै=डालना। विसास=विश्वासघातिनी।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―माया ही प्रभु-भक्ति में बाधक है। जाँणौं जे हरि कौं भजौं, मो मनि मोटी आस। हरि विचि घाले अन्तरा, माया बड़ी बिसास॥
Kabir 16.5
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―माया जीव और ईश्वर के बीच अन्तर डाल देती है।