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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर माया पापणी, हरि सूॅ करै हराम। मुखि कड़ियाली कुमति की, कहण न देई राम॥

Kabir 16.4

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Sūtra Translation

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―कबीर दास जी कहते हैं कि पापी माया अत्यंत दुष्टा है यह जीव को ब्रह्म से मिलने नहीं देती है। यह जीव के मुख से कड़वी बातो को कहवाती रहती है और राम नाम (ब्रह्म) का उच्चारण नहीं होने देती। शब्दाथ―कड़ियाली=कड़वी।