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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―माया का कोई भरोसा नही है उसके फन्दे मे नही पडना चाहिए। माया की झल जग जल्या, कनक कॉमिणीं लागि। कहू, धौं, किहि विधि राखिए, रूई पलेटी आगि॥

Kabir 16.32

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Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कनक और कामिनी-धन और स्त्री के लोभ में फंसकर सारा संसार मसा के जल मे फंस गया और उसी की लपट मे जलने लगा भस्म हो गया। माया तो रूई मे लपेटी हुई आग समान है जिस प्रकार रूई मे लपेटी हुई आग थोडे समय मे ही रूई को जलाने लगती है उसी प्रकार माया भी संसार को जलाने लगती है। विशेष―निदर्शना अलंकार। शव्दार्थ―झल=अग्नि। पलेटो=लपेटी हुई।