―माया रूपी बगुली ने आत्मा के जल को दूषित कर दिया, इससे संसार रूपी सागर भी कलकित हो गया अन्यपक्षी, सासारिक मनुष्य तो इस विषय वासना के पानी को पी गए किन्तु मुक्तात्माओ (हसो) ने इस जल को छुआ तक नही है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
बुगली नीर बिटालिया, सायर चढ़या कलंक। और पखेरू पी गये, हॅस न बोवैं चंच॥
Kabir 16.30
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
=भक्तजन विषय भोगो मे आसक्त नही होते हैं।
Padārtha — Word-meaning
विटा लिया=समाप्त कर दिया। सायर=सागर। हस=मुक्तात्मा।