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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर माया पापणीं, लालै, लाया, लोग। पूरी किनहूॅ न भोगई, इनका ईंहै विजोग॥

Kabir 16.3

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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―कबीरदास जी कहते हैं कि माया अत्यन्त पापिनी है यह संसार के समस्त प्राणियो मे अपने पाने के लालसा को जागृत कर देती है किन्तु वह गृहबहू नही है जिसका एक ही व्यक्ति उपभोग कर सके वह तो वेश्या है उसका पूर्ण ​उपभोग कोई व्यक्ति नहीं कर पाता है। थोड़े समय के लिए माया सबको आकर्षित कर लेती है फिर उससे सबका वियोग हो जाता है। यही ससार का दुःख है। विशेष―रूपक अलकार शव्दार्थ―लालै लाया=अपनी प्राप्ति की आशा जागृत करना।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―माया रूपी वेश्या के फन्दे में फँसकर सभी को कष्ट भोगना पड़ता है।