―माया ने हमसे (जीवात्मा से) यो कहा कि तुझ को मत छोड। किन्तु यह हमारा ही आत्मबल है कि मैं (कबीरदास) माया से अप्रसन्न हो गया और उस माया से रूठ गया, अप्रसन्न हो गया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
माया हम सौं यौ कह्या, तू मति दे रे पूठि। और हमारा हम बलू, गया कबीरा रूठि॥
Kabir 16.29
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―आत्मबल वाले व्यक्ति ही माया से सबन्ध विच्छेद कर पाते हैं।
Padārtha — Word-meaning
―पूठि=पीठ देना।