कबीरदास जी कहते हैं कि इस संसार का माया मोह सभी झूठा प्रपंच है। जिस घर में जितनी ही अधिक प्रसन्नता आनन्द-मंगल दिखाई देता है, वहाँ उतना ही अधिक दुख भी होता है। शाव्दार्थ―बंधावणा=बधन। अन्दोह=दुख।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर इस संसार का, झूठा माया मोह। जिहि घरि जिता बंधावणा, तिहिं घरि तिता ॲदोह॥
Kabir 16.28
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―सुख के साथ दुख भी मिला होता है।