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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

सब आसण आसा तणाँ, निवर्ति कै को नाहिं। निर्वत्ति के निबहै नहीं, परवति पर पंचमांहि॥

Kabir 16.27

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―संसार के समस्त प्राणी आशावान् है सभी पर आशा की प्रभाव है। कोई निवृत्ति मार्गी नहीं है। जो प्रवृत्ति मार्ग का अनुरागी है भला वह आशा से परे होकर निवृत्ति मार्गी कैसे हो सकता है? ​

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―संसार से तटस्थ होकर, प्रवृत्ति मार्ग का परित्याग करके ही निवृत्ति वैराग्य (ईश्वर से राग) उत्पन्न हो सकता है ।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―तर्णा=नीचे। निवर्ति=निवृत्ति। परवर्ति=प्रवृत्ति।