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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर माया मोह को, भई ॲधारी लोइ। जे सूते ते मुसि लिये, रहे बसत कूॅ रोइ॥

Kabir 16.24

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीरदास जी कहते हैं कि इस संसार मे जीव की आँखो पर माया और मोह का अन्धकार छाया हुआ है अतः उसे उचित मार्ग नही दिखाई पडता है। जो व्यक्ति इस माया और मोह के अन्धकार मे सावधान न रहकर अज्ञान मे सोते ही रहते हैं वे ठग लिए जाते हैं और बाद मे मुक्ति रूपी अपनो वस्तु के लिए रोते ही रह जाते हैं। शव्दार्थ―लोइ=नेत्र। मुसि=ठगलिए। वसत=वस्तु, सारतत्व।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―माया मोह मे पडे हुए व्यक्ति मुक्ति नही प्राप्त कर पाते हैं। ​