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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर गुण की बादली, तीतर बानी छाँहि। बाहरि रहे ते ऊबरे, भीगे मन्दिर मांहि॥

Kabir 16.23

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―कबीर दास जी कहते हैं सात्विक, राजस और तामस इन तीनो के सम्मिश्ररण से बनी हुई माया की छाया रग तीतर के पखो के समान बहुरगी होता है। जो इस माया की छाया से बाहर रहते हैं वे तो मुक्त हो जाते हैं और जो माया के प्रभाव से हो आ जाते हैं तो वे माया के प्रभाव से भीगते ही रहते हैं। विशेष―(१) विरोधाभास अलकार।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―माया के प्रभाव से मुक्त व्यक्ति ही आवागमन से मुक्त हो हो पाते हैं।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―तीतरवानी=तीतरवर्णी।