―आत्मा रूपी कमलिनी ने इस संसार सागर मे अपना घर बनाया किन्तु यही अनेकानेक दुखो की दावाग्नि उस कमलिनी को जलाने लगी। और इस प्रकार यह आत्मा रूपी कमलिनी माया रूपी जल मे ही जलकर नष्ट हो गयी। यह सब पूर्व-जन्म के कर्मों का फल था।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
नलनी सायर घर किया, दौं लागी बहुतेणि। जलही माहें जलि मुई, पूरब जनम लिषेणि॥
Kabir 16.22
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―पूर्व जन्म के दुष्कृत्यों के कारण आत्मा को नाता प्रकार के कष्ट सहने पड़ते हैं।