―कबीर दास जी कहते हैं कि यह माया अत्यन्त पिशाचिनी है यह सभी को खाती रहती हैं किन्तु यदि यह सन्तो――साधु स्वभाव वाले व्यक्तियो―के पास जाकर फटकी तो मैं इसके दाँत ही उखाड डालूंगा फिर यह खायेगी कैसे?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर माया डाकणीं, सब किस ही कौं खाइ। दाँत उपाड़ौं पापणीं, जे सन्तौं नेड़ी जाइ॥
Kabir 16.21
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―सन्तो के पास माया जाती है तो उसको नष्ट करने का प्रयास किया जाता है।
Padārtha — Word-meaning
―डाकणी=पिशाचिनी। उपाडौ=उखाडू। नेडी = नजदीक