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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

माया तरवर त्रिविधका, साखा दुख सन्ताप। सीतलता सुपिनैं नहीं, फल फीकौ तनि ताप॥

Kabir 16.20

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―माया रूपी वृक्ष सात्विक, राजस और तामस इन तीन गुणो से मिलकर बना है और इसकी शाखायें दुख और सन्ताप की हैं किन्तु इस वृक्ष के नीचे बैठकर जीव को स्वप्न मे भी शीतलता का अनुभव नहीं हो सकता है और इसके फल भी अत्यन्त फीके हैं और शरीर को ताप देने वाले हैं।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―माया रूपी वृक्ष और उसकी छाया जीव को दुख ही प्रदान करते हैं।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―विविध=सत, रज, तम। ​