―मनुष्य का शरीर स्त्री के रज और पुरुष के वीर्यं के सम्मिश्रण से बनी हुई कली के समान उस पर भी जीव साज सज्जा का आडम्बर करता है किन्तु यदि वह राम नाम का आश्रय न ग्रहण करेगा तो धन और स्त्री रूपी कुएं मे डूब जायगा। विशेष―तुलसी ने भी कहा है― “एक कंचन एक कामिनी दुर्गम घाटी दोइ॥” दोहावली
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
राँम नाँम बिन बूढ़ि है, कनक काँमिणी कूप॥
Kabir 16.19