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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

माया तजी तौ का भया, मानि तजी नहीं जाइ। मनि बड़ै मुनियर मिले, मानि सबनि कौ खाइ॥

Kabir 16.17

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Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―हे जीव! यदि तूने माया का त्याग कर दिया तो उसी के त्याग से क्या होता है अभी सम्मान पाने की भावना का त्याग तो नहीं है। यह मान सम्मान को भावना बडे-बडे मुनियों को भी पथ भ्रष्ट कर देती है। अतः सम्मान की भी परित्याग आवश्यक है।