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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर सो धन संचिए, जो आगैं कू होइ। सीस चढ़ाये पोटली, ले जात न देख्या कोई॥

Kabir 16.13

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीर दास जी कहते हैं कि सुकृत्यो और पुण्यो का ऐसा धन संग्रह करना चाहिए आने के लिए परलोक में काम दे। यद्यपि इस संसार मे लोग धन की गठरी लादे हुए फिरते रहते हैं किन्तु कोई भी व्यक्ति नहीं देखा गया जो उस धन को परलोक ले गया हो। वह सारा का सारा धन यहीं पर पड़ा रह जाता है। ​

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―धन सग्रह अच्छी बात नही है।