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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―माया, मन, आशा और तृष्णा की अमरता की ओर संकेत है। आसा जीवै जग मरै, लोग मरे मरि जाइ। सोइ मूवे धन संचते, सो ऊबरे जे खाइ॥

Kabir 16.12

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

=इस संसार मे लोग एक-एक करके मरते जाते हैं और इस प्रकार सारा संसार ही मरताजा रहा है किन्तु फिर भी आशा जीवित ही बनी है। लोगो के मरने पर भी आशा उनका साथ नहीं छोड़ती है। वे ही व्यक्ति भरते हैं जो धन का संचय किया करते हैं और जो लोग इस धन को खा पी कर साफ कर देते हैं वे इस भव-सागर से पार उतर जाते हैं।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―कबीर दास जी धन संचय पर बल नही देते हैं।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―मूवे=मरते हैं।