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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

माया दासी सन्त की, ऊँभी देइ असीस। बिलंसी अरु लातौं छड़ी, सुमिरि सुमिरि जगदीस॥

Kabir 16.10

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―माया सन्तो की सेवा करने वाली दासी है जो खड़ी हुई उनकी आज्ञा का पालन करती रहती है। सन्त लोग ईश्वर का स्मरण करते हुए इसका उपभोग भी करते हैं और इसका तिरस्कार कर लातो से मार-मार कर ठुकराते भी हैं किन्तु अन्य लोगो को यह दुख ही देती है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

ऊँभी=खडी हुई।