―परमात्मा का प्रेम उसमे मन लगाने से ही प्राप्त हो सकता है। यह सत्य है कि जब तक भक्त का मन ईश्वर की ओर नहीं लगता तब तक ईश्वर का मन भी भक्त की ओर नही झुकता किन्तु जब तक मन को इस संसार के भोगो मे लगाए रहोगे तब तक परमात्मा को प्राप्ति असम्भव ही है। संसार से उदासी न हुआ मन उस सृष्टि के समान है जैसे आकाश में ब्रह्म की ज्योति प्रकाशित होती है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मन दीयाँ मन पाइए, मन बिना मन नहीं होइ। मन उनमन उस अंड ज्यूॅ, अनल अकासां जौइ॥
Kabir 13.9
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―प्रभु को अपने मन का प्रेम देकर ही उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है।
Padārtha — Word-meaning
―मन=प्रेम का हृदय। अकासी=शून्य प्रदेश।