Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

इस मन कौ विसमल करौ, दीठा करौं अदीठ। जे सिर राखौं आपणां, तौ पर सिरिज अंगीठ॥

Kabir 13.6

Audio
Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीरदास जी कहते हैं कि अपने चंचल मन को अधमरा कर सासारिक विषयों से विरक्त कर निराकार अदृष्ट प्रभु के दर्शन करूँगा यदि अपने सिर की रक्षा करनी है तो उसके ऊपर अगारे के समान कठिन से कठिन यातनाओ को भी सहन करना पड़ेगा।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―साधना मे शीश समर्पण करना पड़ता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―विसमिल=घायल। अंगीठ=कष्ट निराकर।