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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर सेरी सांकड़ी, चंचल मनवां चोर। गुण गावै लैलीन होइ, कछू एक मन मैं ओर॥

Kabir 13.4

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―कबीरदास जी कहते हैं कि परमात्मा के समीप पहुँचने का मार्ग बहुत संकरा है। मन चंचल है और चोर के समान लोभी वृत्ति का है। ऊपर से तो यह भगवान के गुणानुवाद गाता है किन्तु आन्तरिक मन मे अनेकानेक इच्छाएं व्याप्त हैं और इसी कारण प्रभु-प्राप्ति मे वाधा पडती है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―मन मे नाना प्रकार की इच्छाएं भरी रहती हैं इसीलिए प्रभु-प्राप्ति नही हो पाती है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―सेरी=मार्ग। लैलोन=तल्लीन।